कूर्मांचल परिषद गढ़ी शाखा के आयोजन में झलका उत्तराखंडी संस्कृति का रंग, महिलाओं ने बनाए पारंपरिक व्यंजन

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देहरादून। कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद गढ़ी शाखा द्वारा आयोजित कार्यक्रम के सातवें दिन की शुरुआत प्रातः नित्य पूजन-अर्चना के साथ हुई। इसके उपरांत महिलाओं द्वारा उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतियोगिता में बेडू पूरी, बड़े, पुवे, रायता, विभिन्न प्रकार के आलू के गुटके, पतोड़, लाल चावल की खीर, चैस, सेल, पीले मीठे चावल, हलवा, आलू-तिल की चटनी, झिंगुर (मादिर) की खीर, लापसी, रोट, चने, भट्ट के डूबके, भरवा पूरी, सिंगल, झोली भात, राई रोटी, मडुवे की रोटी, साया, चुड़कानी और भट्ट का जौला जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। प्रतियोगिता की निर्णायक प्रतिभा पाठक (प्रधानाचार्य) ने अपनी सूझ-बूझ से प्रत्येक व्यंजन की विशेषता बताते हुए विजेताओं का आकलन किया।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बाल अधिकार संरक्षण आयोग उत्तराखंड की अध्यक्ष डॉ० गीता खन्ना ने शिरकत की। दोपहर के सत्र में भक्तिमय माहौल के बीच भव्य भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें सत्यमेव जयते टीम, फुलसेनी की महिलाओं, अंकित विहार, माजरा शाखा, शिव शक्ति मंडली और प्रेमपुर माफी की महिलाओं ने मां के दरबार में एक से बढ़कर एक सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। पूरे आयोजन के दौरान अनंत श्री विभूषित जगदगुरू रामानंदाचार्य श्री स्वामी रामाधाराचार्य जी महाराज का दिव्य आशीर्वाद श्रद्धालुओं को निरंतर प्राप्त होता रहा।

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इस अवसर पर कूर्मांचल परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, कार्यक्रम संयोजक बबीता साह लोहनी, जी सी जोशी, प्रेम तिवारी, हरीश चंद्र पाण्डेय, के डी जोशी, अलका रावत, कल्पना वर्मा और अमित रावत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों से आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों, खान-पान और लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।

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