रिवर्स पलायन कर सोहन सिंह बिष्ट ने रुद्रप्रयाग में स्थापित किया सफल बेकरी उद्यम
प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना से मिला संबल, 10 से 12 लोगों को दे रहे रोजगार; सालाना 8 से 10 लाख रुपये का लाभ
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में युवा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। इसी क्रम में रुद्रप्रयाग जनपद के अगस्त्यमुनि विकासखंड के पाटा गांव निवासी श्री सोहन सिंह बिष्ट की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। पंजाब में नौकरी करने के बाद अपने गांव लौटे सोहन सिंह ने रिवर्स पलायन कर रुद्रप्रयाग में अपना बेकरी व्यवसाय स्थापित किया और आज एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना रहे हैं।
सोहन सिंह बिष्ट अपनी बेकरी इकाई के माध्यम से विभिन्न प्रकार के बेकरी उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। उनकी इकाई में बन, बिस्कुट, पेटीज, विभिन्न प्रकार के केक, ब्रेड और नमकीन तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति रुद्रप्रयाग जनपद के साथ-साथ अन्य जनपदों में भी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर व्यवसाय स्थापित कर उन्होंने न केवल अपनी आजीविका का मजबूत आधार तैयार किया है, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं।
आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर शुरू किया उद्यम
बेकरी व्यवसाय शुरू करने से पहले सोहन सिंह बिष्ट ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से बेकरी उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण से हुनर और व्यवसाय संचालन की जानकारी हासिल करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऋण लेकर अपनी इकाई स्थापित की। इस योजना के अंतर्गत उन्हें 8.50 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसमें 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ प्राप्त हुआ। सरकारी योजना से मिले सहयोग और अपने परिश्रम के बल पर उन्होंने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
सालाना 8 से 10 लाख रुपये का लाभ, 10 से 12 लोगों को रोजगार
आज सोहन सिंह बिष्ट अपने बेकरी उद्यम से प्रतिवर्ष लगभग 8 से 10 लाख रुपये का लाभ अर्जित कर रहे हैं। इसके साथ ही वह 10 से 12 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। उनके उद्यम से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है और अन्य युवाओं को भी अपने क्षेत्र में रहकर स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।
पंजाब में नौकरी करने से लेकर अपने गृह जनपद में सफल उद्यम स्थापित करने तक का सोहन सिंह बिष्ट का सफर इस बात का उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार और व्यवसाय की बेहतर संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उनका प्रयास रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश भी दे रहा है।







