शारदीय नवरात्र में भगवती की आराधना से प्राप्त करें आध्यात्मिक ऊर्जा: स्वामी रामभजन वन महाराज
**नकारात्मकता का त्याग कर शक्ति, साधना और सद्कर्मों को जीवन में उतारने का आह्वान
डरबन/ हरिद्वार। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी, मायापुर, हरिद्वार के अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने शारदीय नवरात्र पर श्रद्धालुओं से माँ भगवती की आराधना के माध्यम से आत्मशक्ति जागृत करने और जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाने का आह्वान किया है।
स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि नवरात्र केवल पूजा-पाठ और व्रत-उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और आंतरिक परिवर्तन का दिव्य अवसर है। माँ दुर्गा के नौ स्वरूप साहस, संयम, विवेक और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं। उनकी उपासना का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर की दुर्बलताओं पर विजय पाना और सद्गुणों को विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि माँ भगवती की आराधना के साथ अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, भय और नकारात्मकता का त्याग करें। भक्ति को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों में उतारें। मंत्र-जप, ध्यान, दुर्गा सप्तशती के पाठ और सात्विक जीवनशैली के साथ सेवा, करुणा तथा परोपकार को भी साधना का अभिन्न अंग बनाएं।
स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि शक्ति की उपासना का अर्थ अन्याय के सामने झुकना नहीं, बल्कि सत्य के पक्ष में खड़े होना, निर्बलों की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना है। सच्ची आध्यात्मिकता वही है, जो मनुष्य को भीतर से सशक्त बनाए और समाज के प्रति उसके दायित्वों का बोध कराए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि इस नवरात्र माँ दुर्गा की आराधना के साथ आत्मजागरण का संकल्प लें। अपने भीतर सद्बुद्धि का प्रकाश जगाएं, बुराइयों का त्याग करें और धर्म, सेवा तथा मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ें। जब श्रद्धा शक्ति बने, साधना संस्कार बने और भक्ति लोककल्याण का माध्यम बने, तभी नवरात्र की उपासना सार्थक होती है।







