श्रद्धा, संकल्प और समर्पण का पर्व है अनंत चतुर्दशी : स्वामी रामभजन वन

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**अनंत सूत्र की 14 गांठों में छिपा सनातन दर्शन का रहस्य

**25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी अनंत चतुर्दशी

हरिद्वार/ मारिशस। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी के अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि अनंत चतुर्दशी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मनुष्य को अनंत परम सत्ता, अटूट संकल्प और सनातन जीवन-दर्शन से जोड़ने का अवसर है। ‘अनंत’ अर्थात जिसका न आदि है, न अंत।

उन्होंने कहा कि अनंत सूत्र की 14 गांठें सनातन परंपरा में 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। सात ऊर्ध्व लोक और सात अधोलोक मिलकर सृष्टि की व्यापक आध्यात्मिक अवधारणा को दर्शाते हैं। अनंत व्रत को 14 वर्ष के संकल्प से भी जोड़ा जाता है।

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स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि अनंत सूत्र धागा नहीं, बल्कि श्रद्धा और संकल्प की डोर है। इसकी प्रत्येक गांठ मनुष्य को संयम, सदाचार, धैर्य और ईश्वर के प्रति समर्पण का स्मरण कराती है।

उन्होंने बताया कि 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर अनंत सूत्र धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि सूत्र टूट जाए तो इसे अपशकुन मानकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर में अटूट विश्वास और जीवन में सदाचार ही अनंत सूत्र का वास्तविक संदेश है।

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