ट्राउट पालन से बलवीर सिंह राणा ने बदली तकदीर, 15 क्विंटल उत्पादन कर कमाया 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

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ट्राउट पालन से बलवीर सिंह राणा ने बदली तकदीर, 15 क्विंटल उत्पादन कर कमाया 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में जनपद रुद्रप्रयाग में मत्स्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से संचालन किया जा रहा है। विभाग द्वारा ग्रामीणों को मत्स्य पालन से जोड़ने के साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक प्रशिक्षण एवं योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्रयासों से जनपद में कई ग्रामीण मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। गैड़ बस्ती गांव निवासी बलवीर सिंह राणा भी इसी पहल से जुड़कर ट्राउट मछली पालन के क्षेत्र में सफलता की नई कहानी गढ़ रहे हैं।

बलवीर सिंह राणा ने अपने गांव में ट्राउट मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने ट्राउट पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिसका लाभ उठाते हुए उन्होंने ट्राउट पालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। आज उनके द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली की बाजार में अच्छी मांग है और उन्हें अपनी मेहनत का बेहतर आर्थिक प्रतिफल भी मिल रहा है।

15 क्विंटल ट्राउट का किया उत्पादन

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बलवीर सिंह राणा ने बताया कि वर्तमान सीजन में उन्होंने करीब 15 क्विंटल ट्राउट मछली का उत्पादन किया है। उत्पादित मछली की बिक्री के लिए उन्हें बाजार के साथ-साथ संस्थागत खरीदार भी उपलब्ध हुए। उनके द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली में से 8 क्विंटल मछली भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा खरीदी गई, जबकि शेष मछली को उन्होंने स्थानीय बाजार में अच्छे दामों पर विक्रय किया।
उन्होंने बताया कि ट्राउट मछली की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ। इससे उनका मत्स्य पालन व्यवसाय लाभकारी साबित हो रहा है। बलवीर सिंह के अनुसार, इस सीजन में उन्हें करीब 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने से उन्हें अपने गांव में ही स्वरोजगार का अवसर मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिली है।

विभागीय सहयोग से मिला प्रोत्साहन

बलवीर सिंह राणा ने बताया कि मत्स्य पालन शुरू करने और इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मत्स्य विभाग का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें ट्राउट पालन की तकनीक, देखभाल, उत्पादन और विपणन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।
उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकता है। यदि ग्रामीण उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करें, तो इससे अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है।

योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को मत्स्य पालन से जोड़ रहा विभाग

जनपद की मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी ने बताया कि मत्स्य विभाग द्वारा ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ ही ग्रामीणों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा जिला योजना के माध्यम से भी ग्रामीणों को मत्स्य व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक ग्रामीण मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाएं। इसके लिए पात्र लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। ट्राउट पालन जैसे व्यवसायों को बढ़ावा देकर पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

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जिला सूचना अधिकारी कृपाल लाल टम्टा ने विभागीय टीम के साथ मत्स्य पालक बलवीर सिंह राणा के तालाबों का किया निरीक्षण

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला सूचना अधिकारी कृपाल लाल टम्टा ने विभागीय टीम के साथ मत्स्य पालक बलवीर सिंह राणा के तालाबों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मत्स्य पालन की व्यवस्थाओं, तालाबों की स्थिति एवं संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी भी मौजूद रहीं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा नया आधार

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मत्स्य पालन से जुड़ रहे ग्रामीणों की सफलता की कहानियां यह दर्शाती हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। बलवीर सिंह राणा की सफलता भी इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने ट्राउट पालन के माध्यम से न केवल अपने लिए रोजगार का साधन तैयार किया, बल्कि यह भी साबित किया कि सरकारी योजनाओं, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

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