परमार्थ निकेतन पधारे माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने किया गंगा पूजन, अभिषेक और अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में अर्पित की आहुतियाँ
उत्तराखंड़ की उत्तरोत्तर उन्नति, भारत की सुरक्षा और विश्व शान्ति हेतु की विशेष प्रार्थना
उत्तराखंड़ राज्य की समृद्धि हेतु किया वैदिक हवन
विश्व के अनेक देशों से आयी 200 से अधिक विदूषियों ने किया वेदों के मंत्रों का गान
आठ दिवसीय अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में 15,000 रुद्रम मंत्रों का जाप, 1,500 रुद्र होम, 300 दुर्गा सप्तशती पाठ, 300 चंडी होम, रुद्रम, दुर्गा सप्तशती, रुद्र घनम्, रुद्र क्रमम्, महान्यासम्, अरुण प्राश्नम्, अश्वमेधम, उदकाशांति आदि अनेक अनुष्ठानों का आयोजन
अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्पंदन
श्री पुष्कर सिंह धामी जी
उत्तराखंड, भारत की आध्यात्मिक चेतना का धड़कता हृदय
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी
ऋषिकेश, 17 अप्रैल। माँ गंगा के पावन तट, परमार्थ निकेतन में आज प्रातःकाल उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी सपरिवार परमार्थ निकेतन पधारे। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, श्रीमती धामी जी और माननीय विधायक यमकेश्वर रेणु बिष्ट जी ने माँ गंगा का पूजन, अभिषेक तथा दिव्य अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में वैदिक विधि-विधान से आहुतियाँ अर्पित कीं।
यह आयोजन उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, सनातन परंपराओं की गरिमा तथा राष्ट्र कल्याण के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक है। माँ गंगा के तट पर 200 से अधिक विदूषियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर पूरे वातावरण को पवित्र ध्वनि से गूंजायमान किया। सम्पूर्ण वातावरण दिव्यता, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य की निरंतर उन्नति, भारत की सुरक्षा, समृद्धि तथा सम्पूर्ण विश्व में शांति और सद्भाव के लिए विशेष प्रार्थना की। साथ ही देवभूमि उत्तराखंड की समृद्धि, प्राकृतिक संतुलन, कल्याण और आध्यात्मिक उन्नयन हेतु विशेष हवन में आहुति अर्पित की।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का धड़कता हृदय है। हिमालय की गोद, मां गंगा की निर्मल धारा और ऋषियों की तपःस्थली यह भूमि सम्पूर्ण मानवता को योग, शांति और धर्म का संदेश देती आ रही है। उन्होंने कहा कि जब सरकार, शासन और आध्यात्मिकता का समन्वय होता है, तब समाज में संतुलन, सेवा और सत्कार्यों का शुभारम्भ भी होता है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ही ने कहा कि परमार्थ निकेतन में आयोजित अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्पंदन है, जो मानवता के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, विश्व शांति और आंतरिक जागरण का संदेश दे रहा है। यह आयोजन उत्तराखंड की आध्यात्मिक गरिमा, सनातन संस्कृति की शक्ति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरक ऊर्जा का अद्भुत संगम है।
माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है, उत्तराखंड की शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना में, और मानवता का भविष्य शांति, सेवा तथा सनातन मूल्यों में निहित है।

इस दिव्य आयोजन में विश्व के अनेक देशों से आयी 200 से अधिक विदूषियों ने वेदों के मंत्रों का सामूहिक गान किया। यह दृश्य सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता तथा नारी शक्ति के वैदिक उत्थान का अनुपम उदाहरण है। विविध देशों, भाषाओं और संस्कृतियों से आई इन साधिकाओं ने वेदमंत्रों के शुद्ध उच्चारण से यह संदेश दिया कि सनातन ज्ञान सीमाओं से परे समस्त मानवता की धरोहर है।
आठ दिवसीय अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ अपने आप में अद्वितीय, विराट और अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इस महायज्ञ में 15,000 रुद्रम मंत्रों का जाप, 1,500 रुद्र होम, 300 दुर्गा सप्तशती पाठ एवं 300 चंडी होम सम्पन्न हो रहे हैं। साथ ही रुद्रम, दुर्गा सप्तशती, रुद्र घनम्, रुद्र क्रमम्, महान्यासम्, अरुण प्राश्नम् अश्वमेधम तथा उदकाशांति आदि वैदिक अनुष्ठानों का भी विधिवत् आयोजन किया गया।
श्री अमृतेश्वर्यंबा समेत जी, श्री अमृतेश्वरानंदनाथ सरस्वती जी, श्री नरेश नटराजन जी, श्री हिमाशु जी के मार्गदर्शन में दक्षिण भारत व लंदन से आये विद्वान नारी शक्ति ने इस अनुष्ठान में सहभाग किया।
परमार्थ निकेतन पधारे मुख्यमंत्री श्री धामी, अभिषेक और अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में अर्पित की आहुतियाँ
