परमार्थ निकेतन में पांच दिवसीय न्यू इयर रिट्रिट

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परमार्थ निकेतन में पांच दिवसीय न्यू इयर रिट्रिट*

योग, ध्यान, यज्ञ, भक्ति संगीत, गंगा आरती, सत्संग और विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन*

विश्व के अनेक देशों से आये प्रतिभागी ले रहे आध्यात्मिक विधाओं का आनन्द*

परमार्थ निकेतन में पाँच दिवसीय न्यू ईयर रिट्रीट- नववर्ष नहीं, नवचेतना का दिव्य घोष*

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ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित पाँच दिवसीय न्यू ईयर रिट्रीट एक आध्यात्मिक आह्वान है। यह रिट्रीट उस क्षण का साक्षी है जब नया वर्ष घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि चेतना के जागरण से आरंभ होता है। हिमालय की गोद में, माँ गंगा के पावन तट पर, यह आयोजन मानव जीवन को उसके मूल उद्देश्य, शांति, संतुलन और करुणा से पुनः जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

इस पाँच दिवसीय रिट्रीट में योग, ध्यान, वैदिक यज्ञ, भक्ति संगीत, दिव्य गंगा आरती, प्रेरक सत्संग और विविध आध्यात्मिक गतिविधियों का समन्वित आयोजन किया गया। वरिष्ठ योगाचार्यों के विशेष मार्गदर्शन में प्रत्येक सत्र केवल अभ्यास नहीं, बल्कि अनुभव है, ऐसा अनुभव जो प्रतिभागियों को बाहरी शोर से निकालकर भीतर की शांति से साक्षात्कार कराता है। प्रातःकालीन योग और ध्यान सत्रों ने शरीर, मन और प्राण के संतुलन को साधा, वहीं वैदिक मंत्रों के साथ सम्पन्न यज्ञ ने वातावरण को ऊर्जा, पवित्रता और सकारात्मकता से ओतप्रोत कर दिया।

विशेष रूप से सायंकालीन गंगा आरती इस रिट्रीट का हृदय बनकर उभरी। दीपों, मंत्रों की ध्वनि और मां गंगा की अविरल धारा यह दृश्य केवल देखने का नहीं, बल्कि आत्मा में उतर जाने वाला था। अनेक प्रतिभागियों के लिए यह क्षण भावनात्मक शुद्धि और जीवन के प्रति कृतज्ञता का अनुभव लेकर आया। भक्ति संगीत और कीर्तन ने मन की परतों को खोलते हुए प्रेम, समर्पण और आनंद की अनुभूति कराई।

इस रिट्रीट की सबसे विशिष्ट विशेषता इसकी वैश्विक सहभागिता रही। भारत सहित विश्व के अनेक देशों अमेरिका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया से आए साधक, योगप्रेमी, शिक्षाविद् और जिज्ञासु यहाँ एक ही सूत्र में बंधे दिखाई दिए। भाषा, संस्कृति और भौगोलिक सीमाओं से परे, सभी को जोड़ने वाली एक ही धारा थी।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नववर्ष केवल तिथि का परिवर्तन नहीं, चेतना का नवजागरण है। आज का मानव बाहरी सुविधाओं में आगे बढ़ा है, पर आंतरिक शांति से दूर होता जा रहा है। योग, ध्यान और सेवा ही वह सेतु हैं जो हमें स्वयं से और प्रकृति से जोड़ते हैं। माँ गंगा हमें निरंतर प्रवाह, पवित्रता और परोपकार का संदेश देती हैं। आइए, इस नववर्ष में संकल्प लें कि हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और सृष्टि के लिए जिएँ। जब जीवन करुणा, संतुलन और सेवा से जुड़ता है, तभी सच्चा आनंद प्रकट होता है।

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पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि नया वर्ष आत्मा से जुड़ने का निमंत्रण है। आज की तेज रफ्तार दुनिया में शांति, विलास का माध्यम नहीं, बल्कि आवश्यकता है। योग और ध्यान हमें वर्तमान में जीना सिखाते हैं, जबकि भक्ति हमें अहंकार से मुक्त कर प्रेम की ओर ले जाती है। इस नववर्ष में स्वयं को समय दें, मौन को अपनाएँ और प्रकृति का सम्मान करें। जब हम अपने भीतर प्रकाश जगाते हैं, तभी हम विश्व में शांति और करुणा का दीप जला सकते हैं।

सत्संग सत्रों में जीवन के गूढ़ प्रश्नों, तनाव, भय, क्रोध, उद्देश्यहीनता और आंतरिक रिक्तता, पर गहन मंथन हुआ। आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता को अत्यंत सरल, व्यावहारिक और प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को यह बोध कराया गया कि अध्यात्म संसार से पलायन नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए संतुलित, सजग और करुणामय जीवन जीने की कला है।

यहाँ हर गतिविधि आत्ममंथन को प्रेरित करती है। कई प्रतिभागियों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने यहाँ केवल योग या ध्यान नहीं सीखा, बल्कि “जीने का नया दृष्टिकोण” पाया। किसी के लिए यह रिट्रीट मानसिक शांति का द्वार बना, तो किसी के लिए जीवन में दिशा और उद्देश्य प्रदान करने वाला है।

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परमार्थ निकेतन का यह पाँच दिवसीय न्यू ईयर रिट्रीट आज के अशांत, असंतुलित और तीव्र गति वाले विश्व में एक आध्यात्मिक प्रकाश-स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आया है।

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