स्वरोजगार की नई राह: बद्री-केदार के सुंदर स्मृति चिह्न बना आत्मनिर्भर बन रहीं अगस्त्यमुनि की महिलाएं

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स्वरोजगार की नई राह: बद्री-केदार के सुंदर स्मृति चिह्न बना आत्मनिर्भर बन रहीं अगस्त्यमुनि की महिलाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल मार्गदर्शन में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेशभर में विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि विकासखंड में ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के तहत महिलाएं स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पहाड़ी विरासत को रोजगार का माध्यम बना रही हैं।
अगस्त्यमुनि में ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बद्रीनाथ, केदारनाथ, धारी देवी, कार्तिक स्वामी और कालीमठ मंदिर समेत अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के आकर्षक स्मृति चिह्न (Souvenir) तैयार कर रही हैं। पहाड़ी शैली में निर्मित मंदिरों और भवनों के सुंदर मॉडल पर्यटकों व श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रहे हैं। इनकी बिक्री से समूह की महिलाओं को अच्छी आमदनी हो रही है।

समूह से जुड़ी युवती दिव्या बताती हैं कि वह पढ़ाई के साथ स्वयं सहायता समूह से जुड़कर धूपबत्ती, अगरबत्ती और विभिन्न मंदिरों के स्मृति चिह्न तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि समूह के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला है और उनके साथ जुड़ी अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्राप्त हो रहा है। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनके परिवारों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

अगस्त्यमुनि के खंड विकास अधिकारी सुरेश शाह ने बताया कि ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। ईस्ट घंडियाल बद्री-केदार स्वयं सहायता समूह से 6 से 7 महिलाएं जुड़ी हैं, जो स्मृति चिह्न निर्माण का कार्य कर रही हैं। तैयार उत्पादों की बिक्री जनपद में स्थापित सरस केंद्रों, स्थानीय बाजारों तथा ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है।

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उन्होंने बताया कि समूह ने वर्ष 2024-25 में ₹2.54 लाख का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹3.95 लाख का लाभ प्राप्त हुआ। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब ₹7 लाख की बिक्री हो चुकी है, जिसमें समूह द्वारा ₹2.75 लाख का लाभ अर्जित किया जा चुका है।

स्थानीय संसाधनों और पहाड़ी संस्कृति को उत्पादों का स्वरूप देकर महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि बद्री-केदार क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को स्मृति चिह्नों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने का कार्य भी कर रही हैं। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई संभावनाओं का मार्ग खोल रही है।

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