हरिद्वार। प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं इण्डियन रेडक्रास का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी नैनीताल द्वारा आयोजित कार्यशाला में Psycho Social Support in Emergencies विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण में विभिन्न आपदाओं में स्वंय द्वारा किये गये कार्यों से प्राप्त अनुभवों को साझा किया। ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय के प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं इण्डियन रेडक्रास का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी नैनीताल द्वारा आयोजित कार्यशाला में Psycho Social Support in Emergencies आपातकालीन स्थिति में मनो सामाजिक सहायता विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभाग कर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इण्डियन रेडक्रास उत्तराखण्ड के चेयरमेन प्रो. डॉ. नरेश चौधरी द्वारा विभिन्न दैवीय प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं में स्वयं द्वारा किये गये जमीनी चुनौती पूर्ण कार्यों से प्राप्त अनुभवों को कार्यशाला मे उपस्थित प्रतिभागियों को विशेष रूप से साझा किया। डॉ. नरेश चौधरी ने 2013 में आयी केदारनाथ भयानक दैवीय आपदा, कुंभ मेलों, सोमवती अमावस्यों जैसे वृहद स्नान पर्वों पर आयी मानव जनित, भगदड जैसी आपदा को तथा कोविड-19 जैसी प्राकृतिक जैविक आपदाओं में घटित घटनाओं से सभी प्रतिभागियों को रूबरू कराते हुए कहा कि आपदाओं के बाद प्रभावित परिवारों एवं व्यक्तियों पर जो प्रभाव पड़ता है उसका असर जीवन भर रहता है। जिससे उबरने एवं फिर से पुर्नस्थापित करने में आकस्मिक रूप से दी गयी मनोसामाजिक सहायता अहम है। जो समाज के समर्पित स्वंयसेवक ही सबसे पहले मौके पर पहुंचकर देते हैं। जो प्रभावित व्यक्तियों को कभी नहीं भूलने वाले दुखों को निश्चित रूप से कम करती है। डॉ. नरेश चौधरी ने कहा कि सभी प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को समाज को विशेष रूप से जागरूक करने का वृहद स्तर पर मनोसामाजिक सहायता के प्रति अभियान चलाना चाहिये जिसमें प्रत्येक व्यक्ति स्वंय मनोसामाजिक सहायता करने वाला सच्चा समर्पित स्वयंसेवक बन सकेगा।
उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अरूण त्रिपाठी एवं कुलसचिव नरेन्द्र सिंह ने कहा कि डॉ. नरेश चौधरी अपने मूल दायित्वों के निर्वहन के साथ आपदाओं में भी समर्पित जन समाज सेवा के लिये हमेशा अग्रणीय रहते हुए अधिक से अधिक कार्यशालाओं, सेमिनार से जो ज्ञान प्राप्त करते हैं उक्त ज्ञान का सीधा लाभ अपने अनुभवों के साथ जन प्रचार- प्रसार के माध्यम से जरुरतबन्दों को तो देते ही हैं साथ ही साथ विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को भी ज्ञान प्राप्त होता है। कार्यशाला में एसडीआरएफ, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक, स्वंयसेवी संस्थाओं के विभिन्न जनपदों के स्वंयसेवकों एवं प्रतिनिधियों द्वारा विशेष प्रतिभाग किया गया। उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी के आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश, कोर्स निदेशक मंजू पाण्डे, रिकोर्स पर्सन कॉर्डियोलोजिस्ट डॉ. सुधाश सिंह, डॉ. मालिनी श्रीवास्तव, डॉ. मधुलता नयाल, अजहर राशिदी ने भी डॉ. नरेश चौधरी को प्रमाण पत्र देकर बधाई देते हुए उनके द्वारा आपदाओं में किये गये कार्यों की सराहना की।
प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी नैनीताल द्वारा आयोजित कार्यशाला में अनुभवों को साझा किया
