आरएसएस देश और समाज को दिशा देने वाला संगठन एकमात्र संगठन: सैनी

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राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा आरएसएस देश और समाज को दिशा देने वाला संगठन एकमात्र संगठन है सभी स्वयंसेवक मां भारती की सेवा में समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं, आरएसएस ने सदैव राष्ट्रहित में कार्य किया है। आज भी आरएसएस समाज एवं राजनीति को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारत का एक ऐसा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी भूमिका केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। इसकी स्थापना राष्ट्रनिर्माण के उद्देश्य से की गई थी और तब से लेकर आज तक संघ ने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है।
आरएसएस का मूल चिंतन व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर होता है। संघ का मानना है कि सशक्त राष्ट्र की नींव सशक्त, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों से ही रखी जा सकती है। इसी उद्देश्य से संघ शाखाओं के माध्यम से अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता के संस्कार विकसित करता है।
समाज के क्षेत्र में आरएसएस ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा-प्रबंधन, ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर अकल्पनीय कार्य किया है। चाहे प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य हों या समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास – संघ की स्वयंसेवी भावना हर परिस्थिति में दिखाई देती है।
राजनीति के संदर्भ में आरएसएस प्रत्यक्ष राजनीति में भाग न लेते हुए भी वैचारिक मार्गदर्शन की भूमिका निभाता रहा है। राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और सुशासन जैसे विचारों को सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनाकर संघ ने राजनीति को केवल सत्ता-केंद्रित न रखकर राष्ट्रकेंद्रित सोच की ओर प्रेरित किया है।
इससे राजनीति में मूल्यों, नैतिकता और दीर्घकालिक दृष्टि का समावेश हुआ है। आज के बदलते वैश्विक और सामाजिक परिदृश्य में आर.एस.एस. की भूमिका और भी प्रासंगिक हो जाती है। संगठन युवाओं को राष्ट्र के प्रति जागरूक, जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ बनाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
यही कारण है कि आरएसएस ने न केवल एक संगठन में ही राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर कार्य किया है, बल्कि वर्तमान में भी समाज व राजनीति को सकारात्मक दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आरएसएस मां भारती को परम वैभव पर ले जाने के लिए निरंतर कार्यरत है l
आज संगठन का विस्तार काफी हो चुका है और भारत में इसकी 88,000 से अधिक शाखाएं संचालित हैं l
शाखोंओ के माध्यम से अनुशासन ,नेतृत्व क्षमता शारीरिक ,स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करने का प्रयास किया जाता है l

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