परमार्थ निकेतन में श्री सोमनाथ की धरती से पधारे संत श्री सागर शास्त्री की के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत ज्ञान धारा प्रवाहित

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*परमार्थ निकेतन में श्री सोमनाथ की धरती से पधारे संत श्री सागर शास्त्री की के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत ज्ञान धारा प्रवाहित*

*श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, उद्बोधन और आशीर्वाद*

*हरित दृष्टि एवं शांतिमय सृष्टि*

*स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

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ऋषिकेश, 13 मई। परमार्थ निकेतन में श्री सोमनाथ की पावन धरती से पधारे संत श्री सागर शास्त्री जी के श्रीमुख से प्रवाहित श्रीमद्भागवत ज्ञानधारा ने श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना से अभिभूत कर दिया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, प्रेम, करुणा एवं मानव जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित प्रेरणादायी प्रसंगों ने सभी को भावविभोर कर दिया।

श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, प्रेरणादायी उद्बोधन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पूज्य स्वामीजी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, प्रेम, सेवा और ईश्वर से जोड़ने वाली दिव्य चेतना है। उन्होंने कहा कि कथाएं तभी सार्थक होती हैं जब उनके संदेश हमारे जीवन, व्यवहार और समाज में दिखाई दें।

आज कथा के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की 7 अपीलों का स्मरण कराते हुये कहा कि ये 7 अपीलें 140 करोड़ भारतीयों के लिये राष्ट्रधर्म का मंत्र हैं। जब देश वैश्विक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा हो, तब हर नागरिक का संयम, त्याग और जागरूकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।

स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित का यह संकल्प आने वाले भारत के स्वर्णिम भविष्य की नींव है इससे बचत देश की, सुरक्षा पर्यावरण की होगी। पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत एवं “मिशन लाइफ” के संदेश को समाज तक पहुंचाने के लिये दिव्य कथायें सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। श्रीकृष्ण जी का कालिया नाग दमन और भगवान शिव द्वारा समुद्र मंथन के समय हलाहल विष को कंठ में धारण करना पर्यावरण संरक्षण के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। ये प्रसंग हमें सिखाते हैं कि प्रकृति, जल और जीवन की रक्षा हेतु त्याग, साहस और संवेदनशीलता आवश्यक है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि अब समय आ गया कि हम हरित कथाओं और प्लास्टिक मुक्त कथाओं के माध्यम से हरित दृष्टि एवं शांतिमय सृष्टि का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि कम गाड़ियां, कम प्रदूषण, कम ईंधन खर्च और विदेशी मुद्रा की बचत यह केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं बल्कि राष्ट्रहित का संकल्प है। उन्होंने आह्वान किया कि पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भारत के निर्माण में सहभागी बनें।

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पूज्य स्वामी जी ने कहा कि जब पर्यावरण सुरक्षित होगा, तभी भविष्य सुरक्षित होगा। देश को प्राथमिकता देना तथा राष्ट्र प्रथम की भावना ही नए भारत की वास्तविक शक्ति है।

गुजरात से आये ओम हेरिटेज परिवार और सैकड़ों भक्त मां गंगा के तट पर बैठकर दिव्य श्रीमद् भागवत कथा, गंगा जी की आरती, पूज्य स्वामीजी के साथ सत्संग का आनंद ले रहे हैं। पूज्य स्वामीजी ने कथा की याद में पौधा रोपण करने का संकल्प कराया।

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