धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में फर्क किया जाना चाहिए-आलोक कुमार
हरिद्वार, 5 फरवरी। विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि हिन्दू समाज के धार्मिक पूजा स्थलों एवं श्रद्धा केंद्रों की अपनी प्राचीन परंपराएं, मर्यादाएं एवं धार्मिक व्यवस्था है। मंदिर पर्यटन या भ्रमण के स्थल नहीं हैं। इसलिए धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में फर्क किया जाना चाहिए। मंदिर में भगवान की प्रतिष्ठा होती है और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के उद्देश्य से वहां आते हैं। जो इस परंपरा में विश्वास रखते हों, उन्हें ही मंदिरों और अन्य धर्मस्थलों पर जाने की अनुमति हो। जो धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता और मूर्ति तोड़ने का आदेश देता हो अथवा जो मानते हों कि उन्हीं का भगवान, उन्हीं की पुस्तक से उन्हें मोक्ष मिलेगा। ऐसे संदर्भों में धार्मिक संस्थाएं अपनी परंपरागत व्यवस्था लागू कर सकती हैं। भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में भाग लेने आए हरिद्वार आए विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि नवरात्रि के दौरान किए जाने वाला गरबा नृत्य केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, अपितु माता अंबा की आराधना से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। पारंपरिक रूप से इसे नंगे पैर एवं दीप ज्योति की परिक्रमा करते हुए देवी की आराधना के रूप में किया जाता है। ऐसे आयोजनों की मूल धार्मिक भावना एवं परंपरा को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में अन्य धर्मों के लोगों को आने का आग्रह करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्व के विभिन्न धर्मों में भी उनके विशिष्ट धार्मिक स्थलों को लेकर विशेष परंपराएं हैं। इस्लाम धर्म में मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों पर गैर मुस्लिम प्रवेश प्रतिबंधित है तथा विभिन्न ईसाई संप्रदायों एवं अन्य धार्मिक परंपराओं में भी धार्मिक स्थलों के संबंध में विशेष व्यवस्थाएं प्रचलित हैं। हमे यह स्वीकार है। क्योंकि वह उनके विशिष्ट धार्मिक स्थल हैं। विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि प्रत्येक धर्म को अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है। उत्तराखण्ड की जनसंख्या संरचना के विषय पर विश्व हिन्दू परिषद की चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में डेमोग्राफी में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। विश्व हिन्दू परिषद मांग करती हैं कि यह अध्ययन किया जाए कि हरिद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों में किसी विशेष समुदाय की बसावट किसी संगठित योजना के अंतर्गत तो नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए समाज एवं शासन को मिलकर संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करना चाहिए। कोटद्वार में हुई घटना के संबंध में पूछे गए प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। विहिप ने बजरंग दल सहित अपने सभी संगठनों को कानून के दायरे में रहकर काम करने का प्रशिक्षण दिया है। संगठन कानून के दायरे में रहकर ही गौरक्षा, लव जेहाद, धर्मांतरण आदि विषयों पर काम करते हैं। कहा कि साथ ही कांग्रेस को बताना चाहिए कि क्या वह कानून हाथ में लेकर मारपीट करने वाले को बब्बर शेर मानती है। यूजीसी के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यूजीसी मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उम्मीद है कि सर्वोच्च अदालत इस पर सर्वमान्य निर्णय देगी। पत्रकारवार्ता के दौरान विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार विभाग प्रमुख पंकज चौहान व अन्य विहिप पदाधिकारी मौजूद रहे।
