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उत्तराखंड के लिंगडे स्वाद के साथ, गुणों से भरपूर हैं, पढ़िये पूरी डिटेल

रिपोर्ट-दीपिका गौड़

देहरादून-उत्तराखंड केवल अपनी खूबसूरती के लिए नहीं बल्कि अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों का भी भंडार है।आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी जंगली सब्जी की जो ना केवल सब्जी है बल्कि अनेक प्रकार की औषधीययुक्त आयुर्वेदिक दवाई भी है।

लिंगडे के औषधीय गुण

पहाड़ी नदी नालों में पाई जाने वाली जैविक पौधे लिंगडे लिंगुड़े या फर्न ना केवल सब्जी है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर है। लिंगुडे में विटामिन ए, विटामिन बी, कांपलेक्स, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैरोटीन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद है वर्षा ऋतु में लिंगुडे बड़े आसानी से पानी वाली जगहों में मिल जाते हैं या फिर बाजारों में यह सब्जी मिल जाती है। पहाड़ी व्यंजनों में इसकी सब्जी और अचार बनाकर भी खाया जाता है।

लिंगडे के औषधीय गुणों के बारे में वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि लिंगुडे मधुमेह और चर्म रोग सहित अनेक बीमारियों को दूर करता है हिमालय की पर्वत श्रृंखला व देश भर में लिंगडे की 1200 प्रजातियो का पता लगाया है। हिमालयन जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर में लिंगुडे पर हुऐ प्रारंभिक शोध से यह बात सामने आई है कि इससे हमें यह पता चलता है कि लिंगडे में मधुमेह और कौन-कौन सी बीमारियों में लड़ने की क्षमता है आइए जानते हैं इसके बारे में।

लिंगडे औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ हमारे शरीर को कई रोगों से मुक्त करने में कारगर है।

डायबिटीज में फायदेमंद – डायबिटीज के रोगियों के लिए यह है रामबाण दवा है। प्राचीनकाल में लोग लिंगडे की हरी डंठल का इस्तेमाल डायबिटीज को दूर करने के लिए करते थे।

लीवर व आंतों की समस्या में कारगर – लिंगडे की हरी कोमल डंठल को हल्की आंच में उबाल कर खाने से तुरंत आराम मिलता है।

कैंसर में लाभदायक – लिंगुडे की हरी कोमल डंठल में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसे उबालकर खाने से या इसकी सब्जी बना कर खाने से कैंसर में फायदेमंद होता है।

गाठिया से मुक्ति – लिंगुडे की जड़ पीसकर जोड़ों पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है।

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