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झारखंड में सियासी खलबली- कभी सादगी की मिसाल बने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी पर क्यों मंडराया खतरा, पत्नी को बनाया जा सकता है मुख्यमंत्री

झारखंड: इन दिनों झारखंड की सियासी ज़मीन पर भूचाल आने का अंदेशा दिख रहा है। जी हाँ, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ( Hemant Soren )की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है। सादगी की मिसाल बने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला आपको इस रिपोर्ट में हम बताने जा रहे हैं ?

साल 2019 में झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हेमंत सोरेन की कुर्सी पर संकट के बादल नजर आने लगे हैं। दरअसल, हेमंत सोरेन की विदाई की कभी भी जा सकती है। चुनाव आयोग ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के मामले में राज्यपाल को रिपोर्ट भेज दी है।

बता दें कि 12 फरवरी 2022 को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास ने एक प्रेसवार्ता की जिसमें उन्होंने कई दस्तावेज जारी करते हुए दावा किया कि सीएम सोरेन ने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने अपने प्रभाव का प्रयोग करके पिछले साल रांची में अपने नाम पर पत्थर उत्खनन पट्टे के लिए स्वीकृति हासिल की।

पट्टे को मंजूरी देने वाले खनन विभाग के दस्तावेज दिखाते हुए उन्होंने सोरेने पर जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

बीजेपी ने दावा किया कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने नाम से रांची के अनगड़ा में 88 डिसमिल पत्थर खनन पट्टा की स्वीकृति ली है। पद के दुरुपयोग का आरोप लगाकर भाजपा ने राज्यपाल से इसकी शिकायत की और सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
इस पर चुनाव आयोग ने राज्यपाल को रिपोर्ट भेजी है। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन पर पट्टे पर खदान अपने और परिजनों के नाम पर रखने का आरोप लगाया गया है जिसके चलते मुख्यमंत्री सोरेन की विधायकी रद्द की जा सकती है। वहीं उनकी जगह पर उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सामने आ रहा है।


वहीं अन्य राज्यों में सियासी हलचल के बाद सत्ता जाने का डर कहीं ना कहीं सूबे के मुखिया के मन में भी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 27 अगस्त को मुख्यमंत्री सोरेन ने अपने विधायकों के साथ बैठक की और उसके बाद विधायकों को 3 बसों में लेकर उन्हें सुरक्षित रिसॉर्ट में शिफ्ट किया गया है।

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