देहरादून. डोईवाला पीजी कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में USF ने इतिहास रचा है! पहली बार डोईवाला पीजी कॉलेज के छात्र संघ चुनावों में प्रतिभाग करने वाली UKD की स्टूडेंट विंग USF ने ABVP के 15 साल की बादशाहत को खत्म किया और 48 वोटो से अध्यक्ष का पद जीता! जो काम NSUI सालों से नहीं कर पाई वो काम USF ने पहली बार ही आकर कर दिया! इस ऐतिहासिक उलटफेर की चर्चा पूरे उत्तराखंड में चल रही है! आखिरी मात्र 1 महीने की तैयारी में UKD के स्टूडेंट विंग USF ने इतना बड़ा उलटफेर कैसे कर दिया जो राष्ट्रीय स्तर के बड़े बड़े संगठन भी नहीं कर पाए आइए जानते हैं कौन थे इस ऐतिहासिक उलटफेर के पीछे! अगस्त के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ USF का डोईवाला पीजी कॉलेज में ये ऐतिहासिक अभियान 1 महीने में ही इतना रणनीतिकार और सफल हुआ कि इसने भाजपा के गढ़ में ABVP के 15 सालों के किले को गिरा दिया! इन सब रणनीतियों के पीछे और अभियान की प्लानिंग के पीछे कुछ विशेष लोगों का योगदान रहा जिनमें खासकर USF के गढ़वाल मंडल चुनाव प्रभारी जतिन सिंह चौहान, और डॉ सौम्य चौधरी जी किंगमेकर के भूमिका में रहें! डॉ सौम्य चौधरी जी ने USF के इस अभियान को आर्थिक रूप से मजबूती दी तो वहीं जतिन सिंह चौहान ने इस अभियान को अपनी कुशल रणनीति से धरातल पर मजबूत किया!
लगातार 16 सालों से जीत रही एबीवीपी के गढ़ को जीतना आसान नहीं था, लेकिन जतिन सिंह चौहान के क्लियर विजन और धरातल पर स्टूडेंट्स के बीच उनके इंपैक्ट और प्रभाव के कारण ये असंभव कार्य संभव हुआ! जतिन सिंह चौहान के बहुत सारे ऐसे कार्य थे जिन्होंने एबीवीपी के दुर्ग को गिराने में अहम भूमिका निभाई चाहे वो मोहित ममगाईं जैसे छात्र नेता को यूएसफ में लेकर आना हो , बच्चों के बीच जाकर खुद अपनी बात रखने से हो, रैलियों के माध्यम से छात्र छात्राओं को जागरूक करना हो, सोशल मीडिया पर पॉजिटिव प्रचार करना हो, ग्राउंड पर संगठन के हर एक व्यक्ति को रणनीतिक रूप से तैयार करना हो, या फिर नए स्टूडेंट्स के बीच उत्तराखंड को लेकर प्रेरणा पैदा करने से हो ये वो अहम कार्य थे जिनका असर ये हुआ कि 15 सालों बाद एबीवीपी को अपने ही गढ़ में हारना पड़ा!
जतिन सिंह चौहान को अभी UKD के संगठन से जुड़े हुए मात्र 10 महीने हुए हैं , इन 10 महीनों में जो राजनीतिक समझ और रणनीति उन्होंने विकसित की वो UKD के लिए फायदेमंद हुई! और यूएसफ गढ़वाल मंडल चुनाव प्रभारी के मात्र 16 दिन के कार्यकाल में जो कार्य उन्होंने किया उसने राष्ट्रीय दलो के खेमों में चिंता लाकर खड़ी कर दी है! उनके कोर टीम का हिस्सा रहे कुछ लोगों का कहना है कि अगर धरातल पर जतिन के काम को देखा जाए तो उन्होंने दूसरे संगठन के सबसे मजबूत छात्र नेताओं और स्टूडेंट्स के माइंड को समझा और उनसे उनके अंदाज में कनेक्ट हुए ये सबसे बड़ा कारण था जिससे यूएसफ ने एबीवीपी के मजबूत गढ़ में सेंध लगा दी! जतिन का कहना है कि ये जीत केवल डोईवाला की जीत नहीं है , ये जीत केवल यूएसफ की जीत नहीं है, ये जीत पूरे उत्तराखंड की जीत है ये जीत उन लोगों की जीत है जो आज भी उत्तराखंड के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं ये उत्तराखंड के उन स्टूडेंट्स की जीत हैं जो आज भी परिवर्तन की विचारधारा रखते हैं!



