मसूरी लंढौर लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का आगाज शब्दों में उतरी लंढौर की विरासत, मसूरी बचाने का संदेश

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देहरादून. मसूरी लंढौर की वादियों में आयोजित दो दिवसीय लैंडौर लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में साहित्य के साथ मसूरी की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की आवाज भी उठी। द चक्कर और मसूरी हेरिटेज सेंटर की ओर से आइवी बैंक में आयोजित फेस्टिवल में देश-विदेश से पहुंचे लेखकों, कवियों और कलाकारों ने साहित्य, कला और बदलते दौर पर विचार साझा किए। फेस्टिवल की शुरुआत वुडस्टॉक स्कूल के विद्यार्थियों के कविता पाठ से हुई। युवा कवि राज बिजलवाण, स्मिता अग्रवाल और किरण भट्ट ने कविता और साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। गढ़वाल इंग्लिश मीडियम स्कूल के विद्यार्थियों ने लोकनृत्य प्रस्तुत कर पहाड़ी संस्कृति की झलक दिखाई। लेखिका रूपलीना बोस ने सौरभ शर्मा के साथ अपनी पुस्तक द समर ऑफ देन पर संवाद किया। वहीं लेखक, अभिनेता और क्रिकेट ब्रॉडकास्टर जेमी ऑल्टर ने मसूरी से अपने जुड़ाव और लेखन यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मसूरी उनके लेखन की प्रेरणा रही है और वह अपने पिता व अभिनेता टॉम ऑल्टर पर पुस्तक लिख रहे हैं, जिसका विमोचन मसूरी में करने की इच्छा है। लेखक जवाहर लाल ने अपनी पुस्तक फॉलोस्पीकृऑडियंस विद द गॉड ऑफ… पर चर्चा की, जिसमें यमराज को मुख्य पात्र बनाया गया है। आयोजक करण मधोक ने आदित्य गौतम और सौरभ शर्मा के साथ अपने उपन्यास मॉमकी का विमोचन किया। मानसी थपलियाल, सुरभि अग्रवाल, इसाक गेरगन और संयुक्ता शर्मा ने कला प्रदर्शित की।फेस्टिवल में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के 23 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। सेंट क्लेयर्स स्कूल के पार्थ ने प्रथम, दुनिया पर्यटक ने द्वितीय और अनुष्का आर्य ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। साहित्य और कला में एआइ के बढ़ते प्रयोग पर भी चर्चा हुई। युवा कवि राज बिजलवाण ने कहा कि लंढौर का साहित्य से पुराना नाता है और इसकी रचनात्मक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने मसूरी-लंढौर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सभी की बताई। आयोजन का समापन मार्तंड बडोनी की लाइव म्यूजिक प्रस्तुति और लोकेश घई की फिल्म द लास्ट शूमेकर्स ऑफ दून वैली की स्क्रीनिंग के साथ हुआ।

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