रुद्रप्रयाग के आँगन में खिला सृजन का पलाश: ‘युवा कला साहित्य मंच’ के रूप में हुई एक नई वैचारिक क्रांति की शुरुआत

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रुद्रप्रयाग। केदारखंड की पावन धरा पर साहित्य और संस्कृति की मशाल को प्रज्वलित करने हेतु रविवार को ‘युवा कला साहित्य मंच’ का शंखनाद किया गया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय डुंगरी केडा, चंद्रनगर के प्रांगण में आयोजित इस “साहित्यिक कुंभ” ने यह स्पष्ट कर दिया कि पहाड़ की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और अपनी भाषा को लेकर अब और भी अधिक सजग है।

विचारों का संगम और कविताओं की सरिता

समारोह का आरंभ मुख्य अतिथि श्री कुलदीप सिंह रावत (सामाजिक कार्यकर्ता) और अध्यक्ष श्री सुमन नेगी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जैसे ही कवियों ने अपनी छंदबद्ध रचनाओं और मुक्तकों का पाठ शुरू किया, पूरा वातावरण साहित्यिक सुगंध से सराबोर हो उठा। इस दौरान वक्ताओं ने लोक-संस्कृति के क्षरण पर चिंता जताई और उसे सहेजने का संकल्प लिया।

सृजन के सिपाही: नवीन कार्यकारिणी का गठन

बैठक में उपस्थित बुद्धिजीवियों की सर्वसम्मति से मंच के संचालन हेतु एक ऊर्जावान टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई:

  • ध्वजवाहक (संस्थापक अध्यक्ष): श्री सतपाल

  • सारथी (उपाध्यक्ष): श्री राकेश जिंरवांण

  • समन्वयक (महासचिव): श्री पंकज बिंदास

  • संरक्षक (कोषाध्यक्ष): श्रीमती प्रियंका

  • संवाद सेतु (मीडिया प्रभारी): श्री कृष्ण कुमार

कार्यकारिणी सदस्य: डॉ० रेशमा पंवार, सोनम काला, अंजली बुटोला, शिवानी नेगी, अखिलेश भैतवाल एवं श्रीकांत।

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मंच की प्रतिबद्धता: सात वचन

मंच ने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि सात प्रमुख उद्देश्यों के रूप में अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई:

  1. युवा प्रतिभाओं का उत्कर्ष: गुमनाम लेखकों और कलाकारों को एक गरिमामय मंच प्रदान करना।

  2. लोकभाषा का गौरव: गढ़वाली लोकभाषा और लोककला के संवर्धन हेतु समर्पित कार्य।

  3. सांस्कृतिक निरंतरता: नियमित रूप से नाट्य मंचन, कवि सम्मेलनों और विचार गोष्ठियों का आयोजन।

  4. छात्रों में चेतना: विद्यालयों के माध्यम से नई पीढ़ी को साहित्य के करीब लाना।

  5. सम्मान की परंपरा: कला और साहित्य के साधकों का नियमित उत्साहवर्धन।

  6. सौहार्द का संदेश: वैचारिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना।

  7. बौद्धिक विकास: समाज में रचनात्मक सोच का संचार करना।

जनप्रतिनिधियों का समर्थन

विशिष्ट अतिथि ग्राम प्रधान श्री अजयवीर सिंह भंडारी सहित महिला एवं नवयुवक मंगल दल के सदस्यों ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मंच रुद्रप्रयाग की पहचान को वैश्विक पटल पर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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