संत सेवा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग : स्वामी संतोषानंद देव

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संत सेवा सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग : स्वामी संतोषानंद देव

**अवधूत मंडल आश्रम में भव्य संत भंडारा, 2500 संतों ने ग्रहण की प्रसादी

हरिद्वार। भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर श्री अवधूत मंडल आश्रम परिसर में गुरुवार को हवन-पूजन के उपरांत भव्य संत भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में करीब 2500 साधु-संतों ने प्रसादी ग्रहण की।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर एवं पीठाधीश्वर महंत संतोषानंद देव महाराज ने कहा कि संत सेवा भारतीय सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। सेवा, साधना और राष्ट्रकल्याण की भावना से किए जाने वाले आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संतों ने राष्ट्र की उन्नति, जनकल्याण और देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना भी की गई। आयोजन में उनके सार्वजनिक जीवन में शासन-सेवा के 25 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया गया।
हरिद्वार के बिल्डर एवं व्यवसायी धर्मेंद्र गुप्ता ने संत सेवा का संकल्प लेते हुए आश्रम परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन कराया। बड़ी संख्या में संत-महात्माओं ने प्रसादी ग्रहण कर आयोजनकर्ताओं को आशीर्वाद दिया।
ऋषिकेश स्थित क्रिया योग आश्रम के प्रणेता महामंडलेश्वर शंकरानंद सरस्वती देशी-विदेशी शिष्यों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। उनके साथ स्वामी श्यामानंद गिरि भी उपस्थित रहे। उन्होंने संतों का आशीर्वाद लिया और संत सेवा के आयोजन में सहभागिता की।
साध्वी नेहा आनंद देव एवं स्वामी आशुतोष आनंद देव ने भी संत सेवा और भंडारे की व्यवस्थाओं में सक्रिय सहभागिता निभाई। आश्रम परिसर में दिनभर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

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